WhatsApp की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठा है। 23 जनवरी 2026 को सैन फ्रांसिस्को कोर्ट में Meta के खिलाफ मुकदमा दायर हुआ। भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स इसमें शामिल हैं। आरोप है कि WhatsApp की End-to-End Encryption एक धोखा है और Meta कर्मचारी निजी मैसेज पढ़ सकते हैं। मुकदमा दावा करता है कि मैसेज लॉक होने से पहले और खुलने के बाद Meta के पास पहुंच जाते हैं। कर्मचारी एक "काम" भेजकर किसी भी यूजर के मैसेज पढ़ सकते हैं। अंदरूनी सूत्रों (Whistleblowers) ने यह जानकारी दी है। Meta ने आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेतुका बताया है। प्रवक्ता Andy Stone ने कहा कि WhatsApp पिछले 10 सालों से Signal Protocol के साथ मजबूत सुरक्षा दे रहा है। Meta ने वादी के वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। Elon Musk ने कहा कि WhatsApp सुरक्षित नहीं है और X Chat इस्तेमाल करें।
Questions Raised Over WhatsApp’s Security: क्या आप सोचते हैं कि WhatsApp पर आपकी बातचीत पूरी तरह सुरक्षित है? क्या आप भी उस हरे रंग के लॉक निशान पर भरोसा करते हैं जो कहता है कि आपके मैसेज पूरी तरह सुरक्षित हैं? तो यह खबर आपको चौंका सकती है!
Meta (WhatsApp की मालिक कंपनी) के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था एक झूठा दावा है और Meta के कर्मचारी आपके निजी मैसेज पढ़ सकते हैं। यह मुकदमा सैन फ्रांसिस्को कोर्ट में 23 जनवरी 2026 को दायर किया गया है। इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के WhatsApp यूजर्स शामिल हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मुकदमे में अंदरूनी सूत्रों का सहारा लिया गया है।
दूसरी तरफ Meta ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और बेतुका बताया है। कंपनी का कहना है कि WhatsApp में पिछले 10 सालों से मजबूत सुरक्षा तकनीक लगाई गई है। तो आखिर सच क्या है? क्या वाकई Meta आपके मैसेज पढ़ सकता है? क्या आपकी प्राइवेसी खतरे में है? और सबसे जरूरी – अब आपको क्या करना चाहिए?
इस लेख में मैं आपको इस पूरे मामले की A to Z जानकारी दूंगा। तो चलिए शुरू करते हैं।
मुकदमे में क्या आरोप लगाए गए हैं?

यह मुकदमा 51 पेज का है और इसमें बहुत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मुख्य आरोप:
1. सुरक्षा व्यवस्था एक धोखा है
मुकदमे में कहा गया है कि WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था “एक फर्जीवाड़ा” है। WhatsApp यूजर्स को बताता है कि सिर्फ आप और जिसे आप मैसेज भेज रहे हैं, वही पढ़ सकते हैं। लेकिन मुकदमा दावा करता है कि यह सच नहीं है।
2. Meta संदेशों को सहेजता और जांचता है
आरोप है कि Meta और WhatsApp “लगभग सभी यूजर्स के कथित तौर पर निजी संदेशों को सहेज सकते हैं, जांच सकते हैं और देख सकते हैं”। यानी आपकी बातचीत कंपनी के सर्वर पर सुरक्षित है और वे इसे पढ़ सकते हैं।
3. कर्मचारी आसानी से देख सकते हैं
मुकदमे का सबसे खतरनाक दावा यह है कि Meta का कोई भी कर्मचारी एक “काम” भेजकर किसी यूजर के मैसेज पढ़ सकता है। बस उन्हें एक इंजीनियर को यह बताना होता है कि उन्हें किसी के मैसेज क्यों देखने हैं।
एक बार इंजीनियर की मंजूरी मिलने के बाद, उस कर्मचारी के कंप्यूटर पर एक खास सुविधा आ जाती है। फिर वह यूजर की आईडी डालकर उसके मैसेज तुरंत पढ़ सकता है।
4. अंदरूनी सूत्रों ने किया खुलासा
मुकदमे में कहा गया है कि Meta के अंदर से कुछ बहादुर कर्मचारियों ने यह जानकारी दी है। हालांकि उनके नाम नहीं बताए गए हैं।
Questions Raised Over WhatsApp’s Security: सुरक्षा व्यवस्था क्या है?
समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था होती क्या है।
आसान भाषा में:
जब आप कोई मैसेज भेजते हैं, तो वह आपके फोन पर बंद (तालाबंद) हो जाता है। फिर वह इंटरनेट के जरिए दूसरे व्यक्ति के फोन पर जाता है और वहां खुलता है।
पूर्ण सुरक्षा का मतलब:
- मैसेज सिर्फ आपके और पाने वाले के फोन पर पढ़ा जा सकता है
- बीच में कोई नहीं पढ़ सकता – न कंपनी, न सरकार, न हैकर
- सुरक्षा की चाबियां सिर्फ आपके फोन पर होती हैं
WhatsApp का दावा:
WhatsApp कहता है कि वह दुनिया की सबसे मजबूत सुरक्षा तकनीक इस्तेमाल करता है।
मुकदमे का दावा – कैसे होता है धोखा?
मुकदमे के अनुसार, असली समस्या यह नहीं है कि सुरक्षा तकनीक कमजोर है। समस्या यह है कि Meta ने इस तकनीक के ऊपर अपना खुद का कोड लगाया है – और उसी में छेद है।
कैसे काम करता है (मुकदमे के अनुसार):
1. मैसेज भेजने से पहले
जब आप कोई मैसेज टाइप करते हैं, तो वह तालाबंद होने से पहले Meta के पास पहुंच जाता है। यानी आपका मैसेज बंद होने से पहले ही पढ़ा जा सकता है।
2. मैसेज मिलने के बाद
जब पाने वाले को मैसेज मिलता है और खुल जाता है, तब भी Meta उसे देख सकता है।
3. फोन पर नियंत्रण
WhatsApp ऐप आपके फोन में लगा है। मुकदमे का कहना है कि ऐप ही मैसेज को बंद/खुलने से पहले/बाद में पढ़ सकता है और Meta के सर्वर को भेज सकता है।
Meta का जवाब – “बिल्कुल झूठे आरोप”
Meta ने इन सभी आरोपों को सख्ती से नकारा है।
Meta के प्रवक्ता Andy Stone ने क्या कहा:
“यह दावा कि लोगों के WhatsApp मैसेज सुरक्षित नहीं हैं, पूरी तरह झूठा और बेतुका है। WhatsApp पिछले 10 सालों से मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के साथ काम कर रहा है। यह मुकदमा एक फालतू काल्पनिक कहानी है।”
Meta ने यह भी कहा कि वे वादी के वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
Meta के तर्क:
- सुरक्षा तकनीक मजबूत है: दुनिया के सबसे बड़े विशेषज्ञ इसे मानते हैं
- 10 साल से इस्तेमाल हो रहा है: 2014 से WhatsApp में सुरक्षा व्यवस्था है
- कोई सबूत नहीं: मुकदमे में ठोस तकनीकी सबूत नहीं दिए गए
- अंदरूनी सूत्र कौन?: नाम नहीं बताए गए तो कैसे माना जाए?
Elon Musk ने भी दिया बयान

Tesla और X (Twitter) के मालिक Elon Musk ने भी इस मामले पर अपनी राय दी।
Musk ने X पर लिखा:
“WhatsApp सुरक्षित नहीं है। X Chat का इस्तेमाल करें।”
Musk ने अपने नए मैसेजिंग फीचर X Chat को बढ़ावा दिया और कहा कि वह असली तौर पर पूरी तरह सुरक्षित है।
Musk का बयान कितना सही?
कई विशेषज्ञों को लगता है कि Musk अपने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए यह बोल रहे हैं। उन्होंने कोई तकनीकी सबूत नहीं दिया कि WhatsApp में क्या गड़बड़ है।
क्या पहले भी हो चुके हैं ऐसे आरोप?
हां, यह पहली बार नहीं है कि WhatsApp की प्राइवेसी पर सवाल उठे हैं।
2021 का विवाद:
2021 में खबर आई थी कि WhatsApp उन मैसेज को हाथ से जांच सकता है जिन्हें यूजर्स ने शिकायत की हो। Meta ने कहा था कि यह सुरक्षा सुविधा है, धोखा नहीं।
2024 का मुकदमा:
सितंबर 2024 में WhatsApp के पूर्व सुरक्षा प्रमुख Attaullah Baig ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उनका आरोप था कि WhatsApp में “साइबर सुरक्षा की बड़ी खामियां” हैं और जब उन्होंने इन्हें ठीक करने की कोशिश की तो उन्हें परेशान किया गया।
गोपनीयता नीति का मुद्दा:
Meta की अपनी गोपनीयता नीति में लिखा है कि वह WhatsApp से मिली जानकारी को अपनी दूसरी कंपनियों (Facebook, Instagram) के साथ साझा करता है। यह भी कई लोगों को परेशान करता है।
Questions Raised Over WhatsApp’s Security: आपकी प्राइवेसी को क्या खतरा है?
भले ही मुकदमा अभी Court में है और फैसला नहीं आया, लेकिन कुछ बातें तो साफ हैं:
1. Metadata तो जरूर Collect होता है
भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों, लेकिन WhatsApp Metadata Collect करता है:
- आपने किसको मैसेज किया
- कब किया
- कितनी बार किया
- आप कहां थे (Location)
- आपका Phone Number
- आपकी Contact List
यह Data एन्क्रिप्टेड नहीं होता और Meta के पास होता है।
2. Cloud Backup खतरनाक
अगर आप Google Drive या iCloud पर WhatsApp Backup लेते हैं, तो वह End-to-End Encrypted नहीं होता। Google या Apple उसे Access कर सकते हैं।
3. Screenshots और Forwarding
अगर कोई आपके मैसेज का Screenshot लेता है या Forward करता है, तो E2EE का कोई फायदा नहीं।
4. Compromised Device
अगर आपका फोन Hack हो जाए या कोई Spy App Install हो जाए, तो E2EE कुछ नहीं कर सकता।
अब आपको क्या करना चाहिए?
1. घबराएं नहीं
अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि Meta सच में मैसेज पढ़ता है। कोर्ट का फैसला आने दीजिए।
2. क्लाउड बैकअप बंद करें
अगर आप ज्यादा गोपनीयता चाहते हैं, तो गूगल ड्राइव/आईक्लाउड बैकअप बंद कर दें। यह सबसे बड़ा खतरा है।
3. संवेदनशील बातें WhatsApp पर न करें
बैंक की जानकारी, पासवर्ड, बहुत निजी बातें WhatsApp पर साझा न करें। फोन कॉल बेहतर है।
4. दूसरे ऐप्स आजमाएं
अगर आप बहुत ज्यादा सुरक्षा चाहते हैं, तो ये ऐप्स आजमाएं:
Signal: सबसे सुरक्षित माना जाता है। Edward Snowden का सुझाव। ओपन सोर्स है।
Telegram: गुप्त चैट्स में मजबूत सुरक्षा है। बाकी सुविधाएं भी अच्छी हैं।
Session: बिना फोन नंबर के काम करता है। बहुत गुमनाम।
5. दो-स्तरीय सत्यापन चालू करें
WhatsApp में दो-चरण की पुष्टि जरूर ऑन कर लें। इससे कोई आपका खाता हैक नहीं कर पाएगा।
निष्कर्ष
WhatsApp पर लगे यह आरोप बहुत गंभीर हैं। अगर यह सच साबित हुए तो 2.8 अरब यूजर्स की प्राइवेसी खतरे में है। खासकर भारत में 80 करोड़ लोग WhatsApp इस्तेमाल करते हैं।
अभी की स्थिति:
- मुकदमा Court में है
- कोई Final फैसला नहीं आया
- Meta के आरोपों को पूरी तरह नकारा है
- Whistleblowers के नाम सार्वजनिक नहीं हैं
याद रखने वाली बातें:
- कोई भी App 100% सुरक्षित नहीं होता
- Metadata हमेशा Collect होता है
- Cloud Backup खतरनाक है
- Privacy के लिए कुछ बलिदान जरूरी है
मेरी राय:
मैं मानता हूं कि WhatsApp में Signal Protocol है और यह काफी मजबूत है। लेकिन यह भी सच है कि Meta एक Advertising Company है जिसे Data चाहिए। तो कुछ न कुछ Data Collection तो हो ही रहा होगा – भले ही Message Content न हो, Metadata तो है ही।
सबसे अच्छा यही है कि बहुत ज्यादा Sensitive बातें किसी भी Messaging App पर न करें। जरूरी हो तो Face-to-Face या Phone Call करें।
नीचे Comment में बताएं – क्या आप अभी भी WhatsApp पर भरोसा करते हैं? या कोई दूसरा App Use करने की सोच रहे हैं?
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ’s)
प्रश्न 1. क्या Meta वाकई WhatsApp के मैसेज पढ़ सकता है?
उत्तर: अभी तक यह साबित नहीं हुआ है। यह सिर्फ मुकदमे में लगाया गया आरोप है। Meta ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है और कहा है कि WhatsApp में Signal Protocol के जरिए End-to-End Encryption है जो पिछले 10 सालों से काम कर रहा है। मुकदमे में Whistleblowers का जिक्र है लेकिन उनके नाम या ठोस तकनीकी सबूत नहीं दिए गए हैं। Court का फैसला आने के बाद ही सच पता चलेगा। तब तक यह सिर्फ आरोप हैं, साबित तथ्य नहीं।
प्रश्न 2. End-to-End Encryption का मतलब क्या है और क्या यह सच में काम करता है?
उत्तर: End-to-End Encryption (E2EE) का मतलब है कि आपका मैसेज आपके फोन पर Lock होता है और सिर्फ receiver के फोन पर ही Unlock होता है। बीच में – न WhatsApp, न सर्वर, न कोई हैकर – कोई नहीं पढ़ सकता।
WhatsApp Signal Protocol इस्तेमाल करता है जो सबसे मजबूत माना जाता है। हां, यह सच में काम करता है। लेकिन मुकदमे में आरोप है कि Meta ने इस Protocol के ऊपर अपना Code लगाया है जो Encryption से पहले या बाद में Messages Access कर सकता है। यह तकनीकी तौर पर संभव है, लेकिन साबित नहीं हुआ।
प्रश्न 3. अगर WhatsApp Encrypted है तो Metadata क्या होता है?
उत्तर: यह बहुत अच्छा सवाल है! Message Content और Metadata में बड़ा फर्क है:
Message Content (Encrypted):
- आपने क्या लिखा
- कौन सी Photo भेजी
- क्या Voice Message भेजा
Metadata (NOT Encrypted):
- आपने किसे मैसेज किया
- कब किया (Date, Time)
- कितनी बार किया
- आप कहां थे (Location data)
- आपका Phone Number
- आपकी पूरी Contact List
- कितनी देर Chat की
WhatsApp यह सारा Metadata Collect और Store करता है। Meta अपनी Privacy Policy में साफ कहता है कि यह Data उनकी दूसरी Companies (Facebook, Instagram) के साथ Share होता है। तो भले ही आपके Messages Encrypted हों, आपकी बहुत सारी जानकारी तो Meta के पास है ही।
प्रश्न 4. क्या मुझे अब Signal या Telegram पर Switch कर लेना चाहिए?
उत्तर: यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है:
WhatsApp पर रहें अगर:
- आपके सभी दोस्त-रिश्तेदार WhatsApp पर हैं
- आपको Extra Security की जरूरत नहीं
- Normal बातचीत करते हैं
Signal पर Switch करें अगर:
- आपको बहुत High Security चाहिए
- Journalist, Activist, या Sensitive काम करते हैं
- Metadata भी Share नहीं करना चाहते
- Open Source App चाहिए
Telegram आजमाएं अगर:
- WhatsApp से ज्यादा Features चाहिए
- बड़े Groups (2 लाख तक) चाहिए
- Cloud-based Storage चाहिए
मेरी सलाह: ज्यादातर लोगों के लिए WhatsApp ठीक है। लेकिन बहुत Important बातों के लिए Signal Better है। दोनों Use कर सकते हैं।
प्रश्न 5. WhatsApp को और ज्यादा Secure कैसे बनाएं?
उत्तर: ये Steps Follow करें:
1. Cloud Backup बंद करें: यह सबसे बड़ा खतरा है। Settings > Chats > Chat Backup > Turn Off
2. Two-Step Verification चालू करें: Settings > Account > Two-Step Verification > Enable. यह 6 Digit PIN set करता है।
3. Disappearing Messages On करें: Important Chats में 24 Hours या 7 Days पर Set कर दें
4. Read Receipts बंद करें: Settings > Privacy > Read Receipts Off. इससे कम Metadata जाता है।
5. Location Permission सावधानी से दें: जरूरी हो तभी Location Share करें
6. Forwarded Messages से बचें: कुछ भी Forward करने से पहले Verify करें
7. Unknown Numbers से सावधान: अनजान नंबर से आए Links पर Click न करें
8. Lock Screen Security रखें: अपने Phone में Strong PIN/Password/Fingerprint रखें
9. Public WiFi पर सावधान रहें: Important Messages भेजने के लिए Mobile Data ही Use करें
ये सभी Steps Follow करने से आपकी WhatsApp Security काफी बढ़ जाएगी।


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